आज भी हमारे देश मे म्यूच्यूअल फण्ड क्या है ( mutual fund in hindi ) ये सवाल हमेशा पूछा जाता हैं। इसके बारे में हम आपको आज अवश्य बयायेंगे। आज भी mutual fund के बारे में लोगोंके मन मे बहुत सारे सवाल हैं। जैसे की,

Mutual fund में निवेश कैसे करे?
Mutual fund में निवेश करने के लिए account कैसे खोले?
Mutual fund में पैसा कितने साल बाद निकाल सकते हैं?
Mutual fund में चार्जेज कितने होते हैं?
Mutual fund के नियम।
कौनसे mutual fund में कितना फायदा होता हैं?
Mutual fund में nominee कैसे करते है या अपना पैसा अपने निधन के बाद नॉमिनी को कैसे मिलते है?
Mutual fund में पैसे कब निवेश करने चाहिए ?
Mutual fund के कितने प्रकार होते हैं?

इतने सारे प्रश्न के उत्तर आज हम इस लेख में जरूर देंगे।जिससे आप के मन मे जो भी mutual fund के बारे में शंका हैं, उसका समाधान आपको मिल सके।

इन प्रश्नों के कारण आज भी हमारे देश मे बहोत सारे लोग mutual fund जैसे अच्छे निवेश विकल्प से वंचित हैं।म्यूच्यूअल फण्ड क्या है (what is mutual fund in hindi) ये आज भी कई लोग जानने की कोशिश कर रहे है

म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?( what is mutual fund in hindi )

Mutual fund वो investment साधन जहाँ आप अपनी संपत्ति बढ़ाने हेतू इस्तेमाल कर सकते हैं। यहा कोई भी आम इन्सान से लेकर बढ़े वर्ग तक निवेश कर सकता हैं।आप प्रति महीना रूपये 500 से भी शुरुवात कर सकते हैं।

Mutual fund मतलब बहुत सारे लोगों द्वारा बना हुआ फण्ड या उन सारे निवेशकों का या उनके पैसे का एक जगह किया हुआ संग्रह।

जिसमे mutual fund कंपनी उस पैसे को स्कीम के मुताबिक अलग अलग जगह पर निवेश करती है। उनकी यही कोशिश रहती हैं की निवेशकों को ज्यादा मुनाफा मिले।

इस जटिल कार्य को करने के लिए हर कंपनी में प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर रहते हैं।

ये पैसे पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं क्योंकी mutual fund कंपनी को SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) द्वारा नियंत्रित किया जाता हैं। इनकी देखरानी में MUTUAL FUND का काम चलता हैं।

Mutual fund History in Indiaभारत में म्यूचुअल फंड का इतिहास

1963 में Reserve Bank Of India और भारत सरकार द्वारा Unit Trust Of India की स्थापना हुई। उस समय से भारत में पहली बार mutual fund उद्योग की नींव रखी गई।

1978 में Reserve Bank Of India UTI से अलग हुई। इसके बाद IDBI BANK को विनियामक और प्रशासनिक नियंत्रण का सम्पूर्ण अधिकार मिला। 1963 से लेकर अबतक MUTUAL FUND INDUSTRY में बहोत सारे बदलाव हुए।

1964 – 1987 यह पहिला दौर जिसमे यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (UTI) के पास ₹.6700 करोड़ का फण्ड जूट गया।

1987 में PUBLIC SECTOR FUND की शुरुआत हुई ।ये वो दौर था जहाँ सारे बैंको को MUTUAL FUNDS का व्यापार करने का मौका मिला। इस दूसरे दौर में ASSETS UNDER MANAGEMENT (AUM) ₹.47004 करोड़ तक पहुच गया।

1993 – 2003 ये तीसरा दौर जहाँ PRIVATE SECTOR FUNDS की शुरुआत हुई।

2003 से चौथे दौर की शुरुआत हुई जहाँ UTI को दो हिस्सों में बाँटा गया। SUTTI और UTI MUTUAL FUND।

2009 में दुनिया मे बड़ी मंदी आई। इस मंदी के चपेट में पूरी दुनिया आर्थिक नुकसान का सामना कर रही थी। इसका असर अपने यहा MUTUAL FUNDS के कारोबार पर भी हुआ। सब निवेशकों को उस समय भारी नुकसान हुआ। लेकिन जिन लोगोने सय्यम रखा उनको आगे भविष्य में मुनाफा भी हुआ।

अब तक भारत मे MUTUAL FUNDS में निवेशकों की संख्या पहले के हिसाब से काफी बढ़ चुकी हैं। हर महीने सब वर्ग के लोग इसमे बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। फिर भी भारत के कुल जनसंख्या के हिसाब से देखा जाए तो ये संख्या आज भी कम हैं।

लेकिन हम ये मानते हैं की आनेवाला समय MUTUAL FUND कंपनी के लिए ज्यादा उत्साह जनक होनेवाला हैं। अब सब लोग म्यूच्यूअल फण्ड क्या है (what is mutual fund in hindi) ये जानने की कोशिश करने लगे है।

Mutual Fund में निवेश कैसे करे?

Mutual Fund में निवेश करने के लिए आपको DMAT ACCOUNT खाते की आवश्यकता नही हैं। इसमे निवेश करना ज्यादा सरल और आसान होता हैं। आप ये काम online भी कर सकते है या बैंक, mutual fund एक्सपर्ट के पास जाकर भी कर सकते हैं। आपको बस छोटा सा आवेदन पत्र भरना होता है।

आज मार्केट में आपको online mutual fund खरीदने के लिए ढ़ेर सारे android app मिल जाएंगे। जहाँ आप आसानी से निवेश कर सकते हैं।

Mutual Funds के नियम और फायदे

अपने लक्ष्य के हिसाब से निवेश करे – Mutual fund में निवेश करते वक्त आप अपनी निवेश समय सीमा पहले तय कीजिये। अपने लक्ष्य (goal) और चुने हुए समय के हिसाब से सही फंड्स का चुनाव कीजिये।

सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप/SIP) – SIP ये एक MUTUAL FUND में निवेश के लिए सबसे आसान और फायदेमंद तरीका है। जहाँ लोग अपने बजट के अनुसार महीना कम से कम 500 रुपये से शरूआत कर सकते है। SIP मे किये हुये निवेश पर चक्रवृद्धि लाभ पा सकते है। इसमे आपकी निवेशित राशि भी कई गुना बढ़ जाती हैं।बाजार के उतार चढ़ाव का फायदा SIP के तहत किये हुए लंबी अवधि वाले निवेश से हमे मिलता है।

जोखिम विविधीकरण – mutual fund मे कोई निवेश करता है तो उन्हें सबसे बड़ा फायदा जोखिम विविधीकरण है। इसी कारण लोगोंका हित ध्यान में रखते हुए आज मार्केट में कई तरह के mutual fund स्किम है। इस लिए पैसे को एक जगह न लगाकर उसे सोच समझ कर टुकड़ो में बाँट दो। जिससे निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे।

सस्ता – शेयर्स को खरीदने के लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है। लेकिन mutual fund स्किम आपको ये सुविधा देती है की आप छोटी पूंजी से भी अपना निवेश कर सके।

अनुभवी पेशेवर विशेषज्ञ – mutual fund में लगाया हुआ पैसा उस क्षेत्र के अनुभवी पेशेवर विशेषज्ञ द्वारा मैनेज किया जाता हैं। जिससे हम जैसे निवेशकों का फायदा हो।

विविधता / विकल्प – हर तरह के निवेशकों को उनके पसंद या ध्येय के अनुसार mutual fund में आज कई तरह के प्रोडक्ट्स हैं। ज्यादा से ज्यादा रिटर्न्स देनेवाले या अधिकतम सुरक्षित निवेश की चाह रखने वाले, सब तरह के फंड्स आज मार्केट में उपलब्ध है।

अनुशासन भरा निवेश – mutual fund में नियमित रूप से निवेश करने से निवेशकों को बचत और निवेश के लिए SIP के तहत अनुशासन बना रहता है। लंबी अवधि में निवेशक इसमे फायदे मे रहते है।

आसान और सरल – MUTUAL FUND मे निवेश करना बहुत ही आसान है। आप किसी वित्तीय सलाहगार की मदद से या online तरीके से mutual fund में निवेश कर सकते हैं।

कर बचत ( TAX BENEFIT ) – MUTUAL FUND से आपको कई ऐसी स्किम मिलेगी जहा आपको TAX BENEFIT के साथ साथ संपत्ति वृद्धि का भी लाभ होगा।
जिसे हम EQUITY LINKED SAVING SCHEME ( ELSS ) कहते है। जब भी निवेश करे तब आप अपनी प्राथमिकता देखके निवेश करे।

MUTUAL FUND SCHEME में NOMINATION( नामांकन )

MUTUAL FUND में NOMINEE परीवार का कोई सदस्य या ऐसा कोई भी व्यक्ति जिस पर आप भरोसा करते है उन्हें बना सकते है।
या एकसाथ आप कई NOMINEE रख सकते है और उनको प्रतिशत के हिसाब से दर्ज कर सकते है। निवेशक को ये पूरा हक है कि वो अपना NOMINEE चूने।

MUTUAL FUND मे पैसा कब INVEST करना चाहिए?

अपनी जरूरत के हिसाब से MUTUAL FUND में आप निवेश कर सकते है। समय और अपने लक्ष्य के हिसाब से FUND चुने। अगर आप EQUITY FUND में पैसे निवेश करना चाहते हैं तो आप जितने जल्दी कम उम्र में निवेश करे उतना आपको फायदा ज्यादा है।

अगर आप रिटायरमेंट के लिए सोच रहे है या रिटायरमेंट के बाद निवेश का सोच रहे है तो उनके लिए अलग से MUTUAL FUND योजनाए है। आप अच्छे वित्तीय सलाहगार से राय लेके अपने लिए अच्छा फण्ड चुन सकते है।
MUTUAL FUND में निवेश करने के लिए कोई निच्छित समय नही। आप जब चाहे निवेश कर सकते है।

Mutual Fund से पैसा कब निकाल सकते है?

आपने कौनसे फण्ड मे अपना पैसा निवेश किया है इसके ऊपर ये निर्भर हैं। अगर आपने liquid fund में पैसे निवेश किये हैं तो आप कभी भी इससे पैसे निकाल सकते है। इस फण्ड का यही सबसे महत्वपूर्ण फायदा है।

वैसे देखा जाए तो आप कोई भी फण्ड से जब वो फण्ड विक्री और पुनर्खरीद के लिए उपलब्ध होगा तब आप उसे वापस ले सकते है। ये equity और debt fund दोनों स्किम में उपलब्ध होता है।

लेकिन आप जब equity fund में निवेश करते है तब आप कम से कम 4 से 5 साल या 10 साल तक उस पैसे को ना निकाले। यहा तक की debt fund में भी 2 -3 साल तक अपना निवेश बनाये रखे।

Mutual fund में चार्जेज कितने होते है?

ENTRY LOAD (प्रवेश भार) – जब यूनिट्स खरीदी जाती है तब ENTRY LOAD लगाया जाता हैं। भारत मे ये निवेश के मूल्य का 2.5 प्रतिशत हुआ करता था। लेकिन 2009 में SEBI ने इस प्रथा को अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया हैं। अब कंपनिया ENTRY LOAD चार्ज नही कर सकते।

EXIT LOAD ( प्रस्थान भार ) – MUTUAL FUND स्किम से बाहर निकलते वक्त ये शुल्क लगाया जाता हैं। ये चार्जेज कितने प्रतिशत लगाना ये पूरी तरह से स्किम और कंपनियों पर निर्भर होता हैं। लेकिन ये शुल्क अनिवार्य नही है। जो लोग तय सीमा से पहले योजना से बाहर निकलने का सोचते है उन निवेशकों को ये शुल्क लगाया जाता है।

TRANSACTION CHARGE ( लेनदेन शुल्क ) – जब कोई निवेशक MUTUAL FUND में निवेश वितरक या मध्यस्थ के माध्यम से करता है, तब ये एक तरह का समय शुल्क लगाया जाता। ये शुल्क सिर्फ निवेश के समय ही लगाया जाता हैं।

ANNUAL FEE / RECURRING CHARGES ( वार्षिक शुल्क / पुनरावर्ती शुल्क ) – MUTUAL FUND स्किम चलाने के लिए या उसके व्यवस्थापन के लिए यह शुल्क लिया जाता है।

MUTUAL FUNDS के प्रकार म्यूच्यूअल फण्ड क्या है (what is mutual fund in hindi)
 आज मार्केट मे कई तरह के MUTUAL FUNDS PRODUCTS उपलब्ध हैं। इसमे कई प्रकार होते हैं।

1) MONEY MARKET FUNDS – ये फण्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। EQUITY की तुलना मे इसमे उतना रिटर्न्स नही मिलता फिर भी अल्प समय मे लाभ पाने के लिए ये स्किम निवेशकों को फायदेमंद होती है। इस फण्ड में पूरी तरह निवेश सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल जैसे कई अन्य सरकारी उपक्रमो मे किया जाता हैं।

2) EQUITY FUNDS – अगर आप ज्यादा समय निवेशित रहकर ज्यादा लाभ पाना चाहते है तो ये फण्ड आपके लिए है। MONEY MARKET या FIXED INCOME FUNDS की तुलना में ये फण्ड ज्यादा रिटर्न्स देने में सक्षम है। इसमे भी विभिन्न प्रकार के फंड्स उपलब्ध होते हैं जैसे की, LARGE CAP FUND, MID CAP FUND या SMALL CAP FUND.

3) FIXED INCOME FUNDS – ये फण्ड निवेशकों को निच्छित दर का भुगतान करते है।

4) BALANCE FUNDS – इंसमे आप EQUITY और FIXED INCOME दोनों का लाभ पाते हैं। जहाँ आपका पैसा विभाजित किया जाता है।
इस प्रकार के फण्ड में निवेशक को EQUITY और DEBT FUNDS दोनों का फायदा मिलता हैं।
बाजार के उतार चढ़ाव में इस फंड्स की जोखिम EQUITY FUNDS की तुलना में बहुत कम होती हैं।

5) INDEX FUNDS – इस फण्ड का परफॉरमेंस मार्केट के उतार चढ़ाव के ऊपर निर्बंध है। बाजार ऊपर जाएगा या नीचे आएगा इसके ऊपर इस फण्ड का मूल्य तय होता है।

ये भी पढिये लॉन्ग टर्म निवेश के लिए 10 शानदार शेयर्स

अब तक हमने इस लेख में म्यूच्यूअल फण्ड क्या है?( what is mutual fund in hindi ) इससे जुड़े आपके हर प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास किया है। ये लेख आपके दोस्त, परीवार या अन्य किसीको सोशल मीडिया द्वारा आप भेज सकते है। जिससे किसीको फायदा हो सके। इससे जुड़े कोई प्रश्न या हमारे लिए कोई सुझाव रहेंगे तो हमे comment कीजिये या ईमेल कीजिये।

धन्यवाद।

लेखन – नयन चव्हाण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *